Wednesday, 25 March 2020

जीवन के रंग- अपनों के संग- घर बैठे बोर हो रहे हैं? (25/03/2020)

Forget not the grace of generations of ancestors; father and mother are God of the family; even so, honour them as Gods with heartfelt service, all you of human birth.

- NORINAGA MOTOORI.


सुबह-सवेरे बाल्कनी में चाय की चुसकियाँ ले रहा था जब पड़ोस में किसी को फोन पर यह कहते सुनकर कि, घर पर बैठे बोर हो रहे हैं, अजीब लगा। क्या घर पर बैठना बोरियत का सबब है? क्या जीवन का सम्पूर्ण आनंद घर के बाहर ही है? क्या घर पर रह कर जीवन का आनंद उठाना हमलोग बिलकुल ही भूल गए हैं?  जीवन के प्रति यह बड़ा विचित्र दृष्टिकोण है। इसी पड़ोसी को यह कहते भी सुना कि ऑफिस में मार्च क्लोसिंग का काम चल रहा है और ऑफिस जाना अति आवश्यक है। क्या हमारे जीवन का लक्ष्य केवल मार्च क्लोजिंग ही रह गया है? जब प्रधान मंत्री महोदय स्वयं आगाह कर रहे हैं कि जान है तो जहान है तब मार्च क्लोजिंग के प्रति यह उत्कंठा इस बात का द्योतक है कि हम मानव नहीं वरन मशीन बन कर रह गए हैं। एक रोबोट जिसमें चाबी भर दी गयी है और वो सारे कार्य मशीनी तरीके से करता चला जा रहा है। भाई साब, कुछ दिन तो बिता लो घर में! 

आप में से हर कोई प्रधान मंत्री महोदय की सलाह का अनुसरण करते हुए घर पर रहते हुए कुछ न कुछ अवश्य कर रहे होंगें। हमने यह समय वो सब करने में बिताया जो ऑफिस की वजह से इन वर्षों में छूटता रहा था। आज से नव-रात्र प्रारम्भ हो गए हैं। आज कोरोना की वजह से ही सही, ऑफिस जाने की अफरा-तरफ़ी नहीं है। अतः समय का सदुपयोग करते हुए देवी का आहवाहन किया। कवच, अर्गला, कीलक, सप्त्श्लोकी एवं सिद्ध्कुंजिकास्तोत्र का पाठ किया और फिर क्षमा-प्रार्थना किया। आज का दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित किया। रूपं देहि, जयम देहि, यशो देहि द्विशों देहि – देवी तुम मुझे रूप दो (आत्मस्वरूप का ज्ञान), जय दो (मोह पर विजय), यश दो (मोह-विजय तथा ज्ञान प्रपतिरूप यश) और काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो। जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो, रणभूमि में शत्रुओं से घिर गया हो विषम संकट में फंस गया हो तथा इस प्रकार भय से आतुर होकर जो भगवती दुर्गा की शरण में प्रकट हुए हों, उनका कभी कोई अमंगल नहीं होता। 

वर्ष 2004 में अंडमान में पोस्टिंग के वक़्त सुनामी के बाद से यह पाठ शुरू किया था जो 2013 में दिल्ली पोस्टिंग के बाद यहाँ की भागमभाग वाली ज़िंदगी की वजह से छूट गया था। महामृत्युंजय का पाठ जो जल्दी-जल्दी मंत्र को देखकर करता था आज शुद्ध उच्चारण के साथ सम्पन्न किया क्योंकि आज वक़्त ही वक़्त है। ईश्वर का यह स्पष्ट संकेत है कि हमें उनके दर्शन मनुष्यों द्वारा बनाए किसी मंदिर मस्जिद अथवा गिरजाघर में नहीं वरन अपने अंतरात्मा में  होंगें। फलतः मनुष्यों द्वारा बनाए ये समस्त मंदिर मस्जिद आज बंद हैं तथापि सृष्टि चलायमान है।    

ऑनलाइन ऑफिस के डाक से निबटने के बाद मैं अपना समय कुछ निजी कार्यों में लगाता हूँ। यह समय है जब मैं अपनी दूसरी किताब को लिख कर समाप्त करना चाहता हूँ। पिछले एक साल के दरम्यान दिल्ली के राष्ट्रीय संग्राहलय, पटना के राजकीय संग्राहलय और खुदा बख्श पुस्तकालय से बिहार विधान सभा डिबेट और बिहार के स्वतन्त्रता संग्रामियों के साथ कृष्ण बल्लभ सहाय के पत्रचार से संबन्धित ढेर सारे दस्तावेज़ एकत्रित करने में सफल रहा था। किन्तु समय की कमी की वजह से इन दस्तावेज़ों पर आधारित पुस्तक को मूर्त रूप देने में असमर्थ था। अब इस काम को निबटाने के लिए इससे बेहतर मौका और कोई दूसरा नहीं हो सकता; अतः इस कार्य को निबटा रहा हूँ।

कुछ समय जबरजस्ती किचन में हाथ बंटाने के नाम पर बिताता हूँ।  कुछ समय पुराने एल्बम में श्वेत-श्याम फोटो देखने में बीतते हैं। इनमें से कुछ यहाँ शेयर कर रहा हूँ। अपनों संग बिताए उन पलों को फोटो में देखकर ताज़ा किया। कुछ समय इधर-उधर सगे-संबंधियों और पुराने मित्रों से फोन पर बात करने में बीत जाते हैं।  कुछ समय साहित्यिक किताबें पढ़ कर बीत रहा है।

1995-1996 के वे बारह महीने जब केवल हम दो ही थे, हम दोनों का समय अक्सर लूडो खेलते बीतता था। आकाशवाणी, जमशेदपुर  का कार्यालय और कैम्पस आदित्यपुर में था जो टाटा के जमशेदपुर म्यूनिसिपल एरिया में नहीं पड़ता था। अतः अक्सर शाम में बिजली चली जाती थी। लूडो खेलना तब मजबूरी थी। जीतने के लिए मैं नित्य नए नियम बना लेता था जिसे वो मान भी लेती थी। किन्तु फिर भी मैं अक्सर हार जाता था। 1996 में 66-61 के स्कोर पर मैं पिछड़ रहा था जब खेल बंद हुआ था। वो खेल पच्चीस साल बाद अब पुनः शुरू हो पाया है। हाँ, यह अवश्य है कि आज खेल में चार खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। किन्तु मेरी स्थिति अब भी वही है- यानि इस खेल में मैं आज भी अपने बच्चों और पत्नी से हार ही रहा हूँ। नंबर वन पर आना बाकी है। पिछले दो दिनों की स्थिति यों है:

तारीख
मैं
मेरी पत्नी
और मेरे बच्चे      किशन
और मुस्कान
23/03/2020
3
2
4
1
24/03/2020
3
2
1
4
    
 बहरहाल,  अभी 21 दिन हाथ में हैं। आगे कोई भी जीत सकता है।

Be happy now. Don’t wait for something outside of yourself to make you happy in the future. Think how really precious is the time you have to spend, whether it’s at work or with your family. Every minute should be enjoyed and savoured.

-EARL NIGHTINGALE.










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